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पूर्व विधायक के पक्ष में पार्क की जमीन पर कब्ज़े की कोशिश, मोहल्ले वालों ने किया विरोध – प्रशासन मौन

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12/07/2025 10:09 AM Total Views: 38484

खरगापुर में जमीन कब्जाने पहुंचे वकील

लखनऊ। एक बार फिर सरकारी भूमि पर दबंगई से कब्ज़ा करने की कोशिश सामने आई है। वर्ष 2015 में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक राम सरन द्वारा मोहल्ले के पार्क की बाउंड्री को तोड़कर जबरन निर्माण की कोशिश की गई थी।

अब एक बार फिर, भाजपा सरकार में भी वे बुलडोज़र सरकार से बेखौफ नजर आ रहे हैं। इस बार उनके साथ करीब एक दर्जन वकील, जनरेटर सेट और निर्माण सामग्री लेकर पार्क की भूमि पर कब्ज़े के लिए पहुंचे।

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स्थानीय निवासियों का विरोध

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पूर्व में भी किया था पार्क कब्जाने की कोशिश

पार्क में अवैध कब्ज़े की जानकारी मिलते ही स्थानीय निवासी एकत्र होकर विरोध करने लगे। चन्दना मुखर्जी (स्कूल प्रबंधक) सहित कई लोगों ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्ज़े को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने पार्क को सार्वजनिक संपत्ति बताते हुए पूर्व विधायक से जमीन खाली करने को कहा।

प्रशासन से की गई शिकायत

निवासियों ने इस पूरे मामले की सूचना मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, सदर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, व उप ज़िलाधिकारी को दी है। साथ ही श्री राम सरन, श्री रविंद्र, श्री योगेन्द्र, श्री नासिर खान, श्रीमती बिन्देश्वरी, व श्री रेखा देवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।

थाना अध्यक्ष का विवादित बयान

स्थानीय थाना अध्यक्ष का रवैया इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि “अगर छह दिन के भीतर कोई स्टे ऑर्डर या उच्चाधिकारियों का आदेश नहीं आया तो पार्क पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। जो भी विरोध करेगा, उसका सीआरपीसी की धारा 151 के तहत चालान किया जाएगा।”

फर्जी आदेश का सहारा

जब निवासियों ने सरकारी संपत्ति और पार्क का हवाला दिया, तो कब्जा करने वालों ने सदर तहसील से इतर बिजनौर तहसील का आदेश दिखाकर कहा कि “कब्ज़ा तो होकर रहेगा।”

जनता की अपील

स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से तत्काल दखल देने और पार्क को बचाने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक मोहल्ले का नहीं, सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासनिक निष्क्रियता पर बड़ा सवाल है। जब कानून के रखवाले ही कानून का साथ न दें, तो आम जनता किसके पास जाए?

 

 

 


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