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PWD झाँसी के चीफ इंजीनियर ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर मुख्यालय द्वारा काली सूची में शामिल ठेकेदार को बहाल करने की तैयारी की,

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14/02/2026 2:16 PM Total Views: 29427

  • मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ठेकेदार द्वारा चाणक्य व प्रहरी पोर्टल में भी अभिलेखों की धोखाधड़ी करने को लेकर साक्ष्यों के साथ भेजी शिकायत

झाँसी । लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय में पंजीकृत ठेकेदार मैसर्स शालिनी दीक्षित (सोल प्रोपराइटर) को स्थायी ब्लैकलिस्ट करने के बावजूद, काली सूची से बाहर निकालने की कवायद में विभाग के मुख्यालय कार्यालय द्वारा काली सूची में डालने और छेत्रीय मुख्य अभियंता को ठेकेदार को काली सूची से निकालने हेतु अधिकृत किए जाने संबंधी आदेश दिनांक 12-12-2024 से, नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण पाने के बाद ब्लैकलिस्ट हुई फर्म को दोबारा “जीवनदान” दिलाने की कोशिश मुख्य अभियंता झाँसी, आरएन गुप्ता द्वारा की जा रही है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रोपराइटर शालिनी दीक्षित ने रोड साइनेज श्रेणी-ए में पंजीकरण के लिए कथित रूप से कन्वर्टर संबंधी कूटरचित दस्तावेज व गलत एफिडेविट प्रस्तुत किए गये जिनका सत्यापन संबंधित संस्था द्वारा कन्वर्टर जारी न करने की पुष्टि पाये जाने के बाद मुख्यालय ने 18.11.2024 के आदेश से ठेकेदार को स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

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इसके बाद 20.12.2024 को मुख्यालय द्वारा स्थायी ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद मुख्यमंत्री की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के अन्तर्गत विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार द्वारा उसके पंजीकरण की तिथि 01.04.2018 से 30.11.2024 के बीच मार्ग/भवन/सेतु/रोड साइनेज/विद्युत श्रेणी में पूर्ण व निर्माणाधीन कार्यों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर तलब की—ताकि गुणवत्ताविहीन कार्यों की भी जांच हो सके।

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अब ‘राहत’ के लिए पत्राचार

ताजा घटनाक्रम में आर0एन0 गुप्ता, मुख्य अभियंता, झाँसी क्षेत्र ने 11.02.2026 को मुख्यालय को पत्र भेजकर ठेकेदार को काली सूची से बाहर निकालने हेतु प्रमुख अभियंता (विकास), विभागाध्यक्ष से लिखित अनुमोदन मांगा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लंबित शिकायतों और जांच को दबाकर स्थायी ब्लैकलिस्ट ठेकेदार को टेंडर दिलाने की जमीन तैयार की जा रही है।

शिकायतें फिर झाँसी को ही क्यों?

शिकायतकर्ता अभिषेक द्वारा उठाए गए शिकायती बिंदुओं की जांच भी मुख्य अभियंता, झाँसी को ही भेजी गई है, तो ऐसी इस्थिति में शिकायतकर्ता का आरोप है कि श्री आर एन गुप्ता निष्पक्ष जाँच कैसे करेंगे, जाँच प्रभावित तय मानी जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि स्पष्ट दिख रहा है कि जांच को ठंडे बस्ते में डालकर “मुर्दे में जान फूंकने” जैसी कवायद की जा रही है।

केंद्र के मेमोरेंडम का हवाला, राज्य में लागू नहीं?

मुख्य अभियंता के पत्र में भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के 02.11.2021 के मेमोरेंडम का उल्लेख कर ब्लैकलिस्ट से बाहर करने की प्रक्रिया का आधार बताया गया है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि उक्त गाइडलाइन को राज्य के PWD में अब तक औपचारिक रूप से अनुमोदित/इंडोर्स नहीं किया गया है। बल्कि विभागीय शासनादेश दिनांक 24-08-1982 तथा प्रमुख अभियन्‍ता, लो0नि0वि0, लखनऊ के पत्र दिनांक 08-10-1982 द्वारा ठेकेदारों के लिए वर्गीकरण एवं पंजीकरण नियमावली के नियम-15 के अन्‍तर्गत उपर्युक्‍त पंजीकरण/नवीनीकरण सम्‍बन्‍धी सुसंगत शासनादेशों एवं शासनादेश संख्‍या-4127एम0एस0/23सा0नि0अनु0-7 दिनांक 02-12-1974 में निहित प्राविधानों के अन्‍तर्गत ही कार्यवाही किए जाने की बाध्यता है।

शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब मूल अहर्ता ही कथित जालसाजी से प्राप्त हुई हो, तब मेमोरेंडम का हवाला देकर राहत का प्रस्ताव भेजना नियमसम्मत नहीं है।

प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी?

गंभीर आरोप यह भी है कि संजय प्रसाद, अपर मुख्य सचिव के उस निर्देश की भी अवहेलना की जा रही है, जबकि यह शिकायती प्रकरण मुख्यमंत्री की आई0जी0आर0एस0 प्रणाली से से आच्छादित बन चुका है, जिस पोर्टल की मॉनिटरिंग स्वयं मुख्यमंत्री करते है।


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