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लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश की नई नीति से मजबूत होंगी सड़कों की गुणवत्ता, बिलो टेंडर पर सख्ती से सुधरेगी साख

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14/02/2026 9:11 PM Total Views: 29437

लखनऊ। प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को नई दिशा देने की तैयारी हो चुकी है। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश (PWD) ने अत्यधिक कम दरों पर प्राप्त होने वाली निविदाओं के निस्तारण हेतु विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट जारी कर विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की पहल की है।

विभाग का मानना है कि अनुमानित लागत से अत्यधिक कम दरों पर ठेके लेने की प्रवृत्ति के कारण कई बार कार्यों में विलंब, गुणवत्ता में कमी और विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रही है। नई नीति के माध्यम से ऐसी अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी और केवल सक्षम, अनुभवी तथा पर्याप्त बिड कैपेसिटी वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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28 फरवरी तक मांगे गए सुझाव

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प्रमुख सचिव अजय चौहान की सलाह पर प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष अशोक कुमार द्विवेदी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस प्रक्रिया निर्धारण पर सभी संबंधित भागीदारों, तकनीकी विशेषज्ञों, ठेकेदारों और संस्थानों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

इच्छुक व्यक्ति/संस्था 28 फरवरी 2026 तक अपने सुझाव केवल ई-मेल hqpwdconceptnote@gmail.com पर भेज सकते हैं। अन्य माध्यमों से प्राप्त सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

क्या है नई नीति की खास बातें?

🔹 5 करोड़ रुपये से कम लागत के कार्य

  • 10% से अधिक कम दर पर निविदा मिलने पर अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करानी होगी।
  • 15% से अधिक कम दर पर कार्य मिलने की स्थिति में संबंधित ठेकेदार के निर्माणाधीन कार्यों की विशेष गुणवत्ता जांच कराई जाएगी।
  • गुणवत्ता खराब पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस देकर दो वर्ष के लिए डिबार किया जाएगा।
  • समान दरें होने पर अधिकतम बिड कैपेसिटी वाले ठेकेदार को प्राथमिकता दी जाएगी।

🔹 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत के कार्य

  • 10% से अधिक कम दरों पर चरणबद्ध अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी अनिवार्य।
  • 15% से अधिक कम दरों पर दो निर्माणाधीन कार्यों की उच्च स्तरीय गुणवत्ता जांच।
  • अन्य विभागों में 5 करोड़ से अधिक लागत के निर्माणाधीन या हाल में पूर्ण कार्यों का गुणवत्ता प्रमाणपत्र अनिवार्य।
  • कार्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर दो वर्ष की डिबारमेंट, अनुबंध निरस्तीकरण और सिक्योरिटी जब्ती का प्रावधान।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

नई व्यवस्था में ‘प्रहरी’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिड कैपेसिटी का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही, अन्य विभागों के निर्माण कार्यों की जानकारी छिपाने पर सख्त कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान रखा गया है।

अपेक्षित लाभ

  • अव्यावहारिक और अवास्तविक कम दरों पर रोक
  • ठेकेदारों की जवाबदेही तय
  • समयबद्ध, टिकाऊ और मानक अनुरूप निर्माण

विभाग की विश्वसनीयता और साख में वृद्धि

PWD की यह पहल न केवल सड़कों की गुणवत्ता को मजबूत करेगी, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और भरोसे को भी नई मजबूती देगी। विभाग को उम्मीद है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर एक प्रभावी और व्यवहारिक प्रक्रिया तय कर प्रदेश में आधारभूत संरचना विकास को नई गति मिलेगी।


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