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PWD में अजब गजब खेल, मुख्यमंत्री कार्यालय ने दिया जांच का आदेश, HOD ब्लैकलिस्ट फर्म को बहाल करने को लिख रहे पत्र

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03/02/2026 8:47 AM Total Views: 38580

HOD पर ब्लैकलिस्टेड फर्म की फाइल ट्रांसफर कराने का आरोप, एफआईआर की मांग तेज

लखनऊ। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जांच के स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद एक ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार फर्म की फाइल को ट्रांसफर कराकर जांच प्रभावित करने की कोशिश का मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा प्रयास जांच को रोकने और फर्म को दोबारा पंजीकरण दिलाने की साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। ब्लैकलिस्ट फर्म पर विभागाध्यक्ष की मेहरबानी को लेकर विभाग में खासी चर्चा है।

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मामला लोक निर्माण विभाग से जुड़ा है, जहां वॉयस ऑफ लखनऊ में प्रकाशित खबर के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने गंभीर अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। इसके क्रम में अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने प्रमुख अभियंता (विकास) और विभागाध्यक्ष को समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

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फर्जी दस्तावेजों से पंजीकरण का आरोप

जांच में सामने आया कि ब्लैकलिस्टेड फर्म द्वारा विभाग के पोर्टल ‘चाणक्य’ और ‘प्रहरी’ पर अलग-अलग दस्तावेज अपलोड किए गए। आरोप है कि फर्म ने कूटरचित अभिलेखों, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, दूसरी फर्म के साइट इंजीनियर की बी-टेक डिग्री की फोटो कॉपी और अपनी मशीनरी न होने के बावजूद फर्जी शपथ पत्र देकर पंजीकरण हासिल किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2018 में, जब फर्म के पास कोई वैध अनुभव नहीं था, तब भी उसका पंजीकरण कैसे हुआ — यह जांच का बड़ा बिंदु है।

जांच से घबराकर फाइल ट्रांसफर की कवायद

जैसे ही विभाग ने 30 जनवरी 2026 को वर्ष 2018 से ब्लैकलिस्ट अवधि तक की पूरी आख्या मांगी, फर्म संचालक में खलबली मच गई। इसके बाद 02 फरवरी 2026 को फर्म संचालक शालिनी दीक्षित द्वारा प्रमुख अभियंता (विकास) को पत्र लिखकर पत्रावली को झांसी जोन ट्रांसफर कराने का प्रयास किया गया।

सूत्रों का कहना है कि यदि फाइल झांसी जोन भेज दी जाती है, तो मुख्यालय स्तर पर चल रही जांच रुक सकती है और फर्म दोबारा पंजीकरण कराने में सफल हो सकती है जो सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय और अपर मुख्य सचिव के आदेशों की अवहेलना होगी।

मिनिस्टीरियल एसोसिएशन का कड़ा रुख

मामले को गंभीर मानते हुए मिनिस्टीरियल एसोसिएशन ने सोमवार को पत्र लिखकर फर्म से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।

एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया है कि फर्म का संचालन करने वाला आशीष दीक्षित मुख्यालय परिसर में बिना प्रवेश पत्र जबरन घुसता है, कर्मचारियों से अभद्रता करता है, ट्रांसफर की धमकी देता है और कार्यालयों में घुसकर एक्सटॉर्शन मनी की मांग करता है। कर्मचारियों के झूठे व भ्रामक वीडियो वायरल करने की धमकियां देने के भी आरोप लगाए गए हैं।

एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब

शासन के निर्देश पर विभाग ने शालिनी दीक्षित फर्म द्वारा फर्जी आईएसओ कन्वर्टर के आधार पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कराए गए कथित अवैध और मानक-विहीन कार्यों की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर मंडल कार्यालयों से मुख्यालय भेजने के आदेश जारी किए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस स्तर पर कार्रवाई को कमजोर किया गया तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा।

सवाल बरकरार

  • अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेशों के बावजूद जांच को प्रभावित होने दिया जाएगा?
  • या फिर फर्जीवाड़े में लिप्त ब्लैकलिस्टेड फर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी?
  • सवाल यह है जिस फर्म को प्रमुख अभियंता द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया आखिर उस फर्म को चीफ इंजीनियर झांसी से क्यों बहाल कराने की कोशिश की जा रही।
  • जब फर्म की संचालक ने अपने पत्र में खुद ही गलती मान ली है। तब उसके ऊपर पेनाल्टी और fir की बजाय बहाली की कोशिश क्यों।

 


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