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एक खबर… जिससे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए मोरारजी देसाई, पढ़ें- शास्त्री के हाथ कैसे लगी थी बाजी

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14/04/2024 11:24 AM Total Views: 35816

रायबरेली से ब्यूरो चीफ, दीपक कुमार

27 मई 1964 की रात को जवाहरलाल नेहरू का निधन उनके स्नान-गृह में हो गया था. उनके डॉक्टर ने खास निर्देश दे रखे थे कि उन्हें अकेला न छोड़ा जाए, फिर भी जब वे स्नान-गृह में गए तो उनके पास कोई नहीं था. डॉ. विग ने कहा था कि स्नान-गृह में गिरने के बाद नेहरू एक घंटे से भी ज्यादा देर तक उसी अवस्था में पड़े रहे थे, ये सबसे बड़ी लापरवाही थी. डॉ. विग ने कहा था कि लोगों को पता था कि वे बीमार थे, लेकिन किसी को भी उनके इतनी जल्दी निधन की उम्मीद नहीं थी. नेहरू के निधन की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. पूरा देश स्तब्ध रह गया और असुरक्षा और अनिश्चय की भावना से घिर गया. सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब देश की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाए.

नेहरू का पार्थिव शरीर अभी उनके घर पर ही रखा हुआ था कि उनके उत्तराधिकार का सवाल उठ खड़ा हुआ. बड़ी उम्र के कांग्रेस नेता जिन्हें ‘सिंडिकेट’ कहा जाता था, इस मामले में एकजुट थे. विरासत की लड़ाई को लेकर तत्कालीन गृह सचिव वी. विश्वनाथन कुछ ज्यादा ही आशंकित थे. उन्होंने सभी राज्यों को यह संदेश भेज दिया कि दिल्ली में बहुत ज्यादा तनाव है. इसके बाद जल्द ही उन्होंने यह निर्देश जारी कर दिया कि सुरक्षा सेनाओं को किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी.

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27 मई 1964 की रात को जवाहरलाल नेहरू का निधन उनके स्नान-गृह में हो गया था. उनके डॉक्टर ने खास निर्देश दे रखे थे कि उन्हें अकेला न छोड़ा जाए, फिर भी जब वे स्नान-गृह में गए तो उनके पास कोई नहीं था. डॉ. विग ने कहा था कि स्नान-गृह में गिरने के बाद नेहरू एक घंटे से भी ज्यादा देर तक उसी अवस्था में पड़े रहे थे, ये सबसे बड़ी लापरवाही थी. डॉ. विग ने कहा था कि लोगों को पता था कि वे बीमार थे, लेकिन किसी को भी उनके इतनी जल्दी निधन की उम्मीद नहीं थी. नेहरू के निधन की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. पूरा देश स्तब्ध रह गया और असुरक्षा और अनिश्चय की भावना से घिर गया. सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब देश की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाए.

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नेहरू का पार्थिव शरीर अभी उनके घर पर ही रखा हुआ था कि उनके उत्तराधिकार का सवाल उठ खड़ा हुआ. बड़ी उम्र के कांग्रेस नेता जिन्हें ‘सिंडिकेट’ कहा जाता था, इस मामले में एकजुट थे. विरासत की लड़ाई को लेकर तत्कालीन गृह सचिव वी. विश्वनाथन कुछ ज्यादा ही आशंकित थे. उन्होंने सभी राज्यों को यह संदेश भेज दिया कि दिल्ली में बहुत ज्यादा तनाव है. इसके बाद जल्द ही उन्होंने यह निर्देश जारी कर दिया कि सुरक्षा सेनाओं को किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी.


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