News Nation Today

Latest Online Breaking News

एक खबर… जिससे प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए मोरारजी देसाई, पढ़ें- शास्त्री के हाथ कैसे लगी थी बाजी

Watermark

WhatsApp Icon

14/04/2024 11:24 AM Total Views: 38449

रायबरेली से ब्यूरो चीफ, दीपक कुमार

27 मई 1964 की रात को जवाहरलाल नेहरू का निधन उनके स्नान-गृह में हो गया था. उनके डॉक्टर ने खास निर्देश दे रखे थे कि उन्हें अकेला न छोड़ा जाए, फिर भी जब वे स्नान-गृह में गए तो उनके पास कोई नहीं था. डॉ. विग ने कहा था कि स्नान-गृह में गिरने के बाद नेहरू एक घंटे से भी ज्यादा देर तक उसी अवस्था में पड़े रहे थे, ये सबसे बड़ी लापरवाही थी. डॉ. विग ने कहा था कि लोगों को पता था कि वे बीमार थे, लेकिन किसी को भी उनके इतनी जल्दी निधन की उम्मीद नहीं थी. नेहरू के निधन की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. पूरा देश स्तब्ध रह गया और असुरक्षा और अनिश्चय की भावना से घिर गया. सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब देश की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाए.

नेहरू का पार्थिव शरीर अभी उनके घर पर ही रखा हुआ था कि उनके उत्तराधिकार का सवाल उठ खड़ा हुआ. बड़ी उम्र के कांग्रेस नेता जिन्हें ‘सिंडिकेट’ कहा जाता था, इस मामले में एकजुट थे. विरासत की लड़ाई को लेकर तत्कालीन गृह सचिव वी. विश्वनाथन कुछ ज्यादा ही आशंकित थे. उन्होंने सभी राज्यों को यह संदेश भेज दिया कि दिल्ली में बहुत ज्यादा तनाव है. इसके बाद जल्द ही उन्होंने यह निर्देश जारी कर दिया कि सुरक्षा सेनाओं को किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी.

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

27 मई 1964 की रात को जवाहरलाल नेहरू का निधन उनके स्नान-गृह में हो गया था. उनके डॉक्टर ने खास निर्देश दे रखे थे कि उन्हें अकेला न छोड़ा जाए, फिर भी जब वे स्नान-गृह में गए तो उनके पास कोई नहीं था. डॉ. विग ने कहा था कि स्नान-गृह में गिरने के बाद नेहरू एक घंटे से भी ज्यादा देर तक उसी अवस्था में पड़े रहे थे, ये सबसे बड़ी लापरवाही थी. डॉ. विग ने कहा था कि लोगों को पता था कि वे बीमार थे, लेकिन किसी को भी उनके इतनी जल्दी निधन की उम्मीद नहीं थी. नेहरू के निधन की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. पूरा देश स्तब्ध रह गया और असुरक्षा और अनिश्चय की भावना से घिर गया. सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब देश की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाए.

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

नेहरू का पार्थिव शरीर अभी उनके घर पर ही रखा हुआ था कि उनके उत्तराधिकार का सवाल उठ खड़ा हुआ. बड़ी उम्र के कांग्रेस नेता जिन्हें ‘सिंडिकेट’ कहा जाता था, इस मामले में एकजुट थे. विरासत की लड़ाई को लेकर तत्कालीन गृह सचिव वी. विश्वनाथन कुछ ज्यादा ही आशंकित थे. उन्होंने सभी राज्यों को यह संदेश भेज दिया कि दिल्ली में बहुत ज्यादा तनाव है. इसके बाद जल्द ही उन्होंने यह निर्देश जारी कर दिया कि सुरक्षा सेनाओं को किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी.


लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930