News Nation Today

Latest Online Breaking News

पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में दलाली और मनमानी के आरोप, मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत

Watermark

WhatsApp Icon

10/12/2025 12:33 AM Total Views: 38466

लखनऊ। लोक निर्माण विभाग (PWD) मुख्यालय में दलाली कर रहे एक व्यक्ति आशीष दीक्षित पर गंभीर आरोप लगाते हुए समाजसेवी अभिषेक द्वारा मुख्यमंत्री को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा गया है। शिकायत के अनुसार, दीक्षित पर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का उपयोग कर ठेका-पट्टों के नाम पर कर्मचारियों से धनराशि वसूलने और गोपनीय सूचनाएँ हासिल करने का आरोप लगाया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति मुख्यालय के विभिन्न कक्षों में बिना अनुमति प्रवेश कर कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर धमकाता है और ट्रांसफर सम्बन्धी गोपनीय जानकारी लीक कर कथित रूप से आर्थिक लाभ कमाता है।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

महिला कार्मिकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी शामिल

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

प्राप्त पत्र में आरोप है कि दीक्षित द्वारा महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार, अमर्यादित भाषा का प्रयोग तथा सोशल मीडिया पर उन्हें बदनाम करने जैसी गतिविधियाँ की गईं। शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया है कि यह विभाग में महिलाओं की गरिमा के विपरीत है, जबकि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दे रही है।

फर्जी दस्तावेज और फर्म को ब्लैकलिस्ट किए जाने का उल्लेख

शिकायत में दावा किया गया है कि दीक्षित ने अपनी माता के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक कंपनी/फर्म पंजीकृत करवाई, जिसे विभाग पहले ही काली सूची में डाल चुका है। आरोप है कि इसके बावजूद विभागीय स्तर पर आरोपी पर अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। वही अधिकारियों की मिली भगत का भी आरोप लगाया गया है।

मुख्यमंत्री से निम्न प्रमुख मांग

  • आशीष दीक्षित के विरुद्ध संबंधित थाने में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
  • दीक्षित की फर्म द्वारा करवाए गए कार्यों की जांच कर वसूली की कार्रवाई की जाए।
  • विभागीय मुख्यालय के मुख्य द्वार पर उक्त व्यक्ति के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  • ट्रांसफर सत्र के दौरान बढ़ रही कथित गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ।

 

 

 


लाइव कैलेंडर

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930