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PWD बरेली और ठेकेदार जावेद खान से तंग पीड़ित ने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु मांगी

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25/06/2025 9:44 PM Total Views: 38474

  1. मनमानी ढंग से जावेद को दिए गए 100करोड़ से अधिक के टेंडर

बरेली/लखनऊ । उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और बरेली के चर्चित ठेकेदार जावेद खान पर गंभीर भ्रष्टाचार, दस्तावेज़ों की हेराफेरी और मनमानी टेंडर प्रक्रिया के आरोप लगे हैं। पीड़ित सतीश चंद्र दीक्षित, निवासी नेकपुर, बदायूं, ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर स्वयं और अपने परिवार के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। उनका आरोप है कि वह पिछले पांच वर्षों से मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर दिए गए हैं।

क्या हैं आरोप?

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सतीश दीक्षित के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में जावेद खान को लगभग 200 कार्यों के टेंडर मनमानी दरों पर दिए गए, जिनकी कुल लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 में जावेद खान ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर साइनेज कार्य के लिए पंजीकरण करवाया और उसी आधार पर दर्जनों टेंडर लेकर जनता का करोड़ों रुपये लूटा।

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फर्जी दस्तावेज़, टेंडर में हेराफेरी

दीक्षित ने एक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने 514 लाख रुपये का टेंडर डाला था, लेकिन जावेद खान ने फर्जी शिकायतों के जरिए इसे चार बार निरस्त करवाया। बाद में उसी कार्य को सिंगल टेंडर के रूप में खान को 47 लाख रुपये अधिक दर पर स्वीकृत करा लिया गया, जिसमें कूटरचित दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए गए और फिर सबूत मिटाने के लिए उन्हें पोर्टल से हटा दिया गया।

लोकायुक्त की जांच, हाईकोर्ट का आदेश भी निष्क्रिय

सतीश दीक्षित की शिकायत पर उत्तर प्रदेश लोकायुक्त ने जांच करवाई और 6 अभियंताओं को 17 आरोपों में दोषी पाया। लोकायुक्त ने शासन को तीन माह में कार्रवाई की सिफारिश की, जिसे हाईकोर्ट ने भी समर्थन दिया। लेकिन न तो लोकायुक्त की सिफारिश पर, न उच्च न्यायालय के आदेश पर, और न ही अवमानना नोटिस के बावजूद दोषियों पर कोई कार्रवाई हुई।

झूठे मुकदमे और ब्लैकलिस्टिंग की साज़िश

पीड़ित ने बताया कि जावेद खान की शह पर तीन झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। उन्हें तीन बार ब्लैकलिस्ट किया गया, जबकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से ब्लैकलिस्टिंग आदेश को तानाशाही बताकर खारिज कर दिया था। बावजूद इसके, विभाग अब फिर से मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

रामपुर में भी 25 करोड़ का पुल कार्य फर्जी अनुभव पर

दीक्षित ने आरोप लगाया कि रामपुर जिले में जावेद खान को सेतु निगम से 25 करोड़ रुपये का कार्य फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर मिल गया। जिसमें भी कोई जांच नहीं हुई। उन्होंने कहा, “हमने 5 साल भ्रष्टाचार से लड़ाई की, लेकिन न्याय की जगह एफआईआर और ब्लैकलिस्टिंग मिली।”

अंतिम अपील: इच्छामृत्यु की मांग

सतीश चंद्र दीक्षित ने पत्र में लिखा है कि वह और उनका परिवार अब आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

 

 

 

 


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