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योगी के PWD में ‘तेल के खेल’ का महाघोटाला

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18/01/2026 7:22 PM Total Views: 38477

कन्डम गाड़ियों पर हर माह सैकड़ों लीटर डीज़ल, करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर
लखनऊ। मुख्यमंत्री के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से चल रहे “तेल के खेल” का बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। कन्डम (निष्प्रयोज्य) घोषित वाहनों पर हर माह सैकड़ों लीटर डीज़ल–पेट्रोल इश्यू कर करोड़ों रुपये के गबन किया गया है।

इस घोटाले की शिकायत ठाकुरगंज निवासी कौशल किशोर साहू ने दर्ज कराई हैं। शिकायतों के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। और घोटाले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं।
मानचित्रकार से JET बनकर ‘फर्जी JE मैकेनिकल’!
आरोप है कि मानचित्रकार पद से पदोन्नत होकर JET बने अनिल कुमार को नियम विरुद्ध यांत्रिक खण्ड में तमाम चार्ज सौंपे गए। उन्हें फर्जी तरीके से JE (मैकेनिकल) के रूप में स्थापित कर कन्डम खड़ी गाड़ियों के नाम पर प्रतिमाह 600–700 लीटर तेल दिखाकर ₹60 से 70 हजार प्रति वाहन का फर्जी भुगतान कराया गया। यह भुगतान कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सहायक अभियंताओं और अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद की मिलीभगत से पास कराया गया। इस खेल में एसई आर एम श्रीवास्तव एवं मुख्य अभियंता यूके सिंह का संरक्षण प्राप्त है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जैसे-जैसे भ्रष्टाचार उजागर होने लगा, वैसे-वैसे मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं। मुख्यालय में जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हुए वही सहायक अभियंता जांच में लगाए गए जिन पर खुद आरोप हैं। इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिखावटी कार्रवाई, मलाईदार चार्ज बरकरार
भले ही कागजों में अनिल कुमार से कुछ चार्ज हटाए गए हों लेकिन अवर अभियंता (मुख्यालय) जैसा सबसे अहम और प्रभावशाली चार्ज आज भी उनके पास बना हुआ है। इसके जरिए पूरे खण्ड पर उनका दबदबा कायम है और जांच को प्रभावित किया जा रहा है। जबकि यांत्रिक खण्ड में तीन अन्य अवर अभियंता तैनात होने के बावजूद उन्हें कोई चार्ज नहीं दिया गया।
20,000 किमी सर्कुलर भी बना ‘ढाल’
खुद को फंसता देख अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद द्वारा आनन-फानन में 02 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी किया गया, जिसमें सरकारी वाहनों को प्रतिमाह 20,000 किमी तक चलने की अनुमति दी गई। सवाल यह है कि मुख्यालय परिसर में खड़ी कन्डम गाड़ियाँ आखिर 20,000 किमी कैसे चल रही थीं?
कन्डम जीप की ‘जिंदगी’ वापस!
तेल घोटाले की जांच के बीच एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। कन्डम घोषित जीप URE 3740, जो महीनों से वर्कशॉप में खड़ी थी, उसे अचानक डेंट-पेंट, इंजन रिपेयर और नए टायर लगवाकर परिसर की नई पार्किंग में खड़ा कर दिया गया। इसे जांच से सबूत मिटाने की कोशिश माना जा रहा है। जबकि मुख्य अभियंता यूके सिंह ने अगस्त 2025 में कंडम घोषित किया है।

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स्टाफ कारों पर भी सैकड़ों लीटर तेल।           

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अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद की बोलेरो (UP 32 BG 6865) पर हर माह 500–600 लीटर तेल
अधीक्षण अभियंता आर.एम. श्रीवास्तव की स्टाफ कार पर भी ऐसा ही खेल
कन्डम एम्बेसडर कार (UP 32 BG 5191) पर वर्षों से तेल इश्यू। इन सबका औचित्य आज तक स्पष्ट नहीं किया गया।
150 नई गाड़ियों में भी ‘इंसेंटिव’ का खेल!
सूत्रों के अनुसार यांत्रिक खण्ड में जल्द आने वाली लगभग 150 नई कारों की आपूर्ति में भी प्राइवेट कंपनी–अनिल कुमार–उच्च अधिकारियों के बीच इंसेंटिव की बंदरबांट की तैयारी है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि
यांत्रिक खण्ड से अलग किसी स्वतंत्र सिविल मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता से निष्पक्ष जांच कराई जाए
कन्डम गाड़ियों पर इश्यू तेल से हुई वसूली अनिल कुमार JET से कराई जाए
उन्हें तत्काल दूसरे मण्डल में स्थानांतरित किया जाए
दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई कर नजीर पेश की जाए।
IGRS में भी फर्जी रिपोर्ट!
पहले की गई शिकायत पर IGRS में जांच कर रहे अधिकारियों ने अनिल कुमार के पक्ष में फर्जी रिपोर्ट लगा दी, जबकि 02.01.2026 के आदेश से उनका चार्ज हटाया जा चुका है। मुख्यमंत्री कार्यालय से फीडबैक मांगने पर शिकायतकर्ता ने असंतोष जताया है।
अब बड़ा सवाल 
क्या PWD मुख्यालय में वर्षों से चल रहा यह ‘तेल का खेल’ यूं ही दबा दिया जाएगा, या इस बार सचमुच किसी बड़े मगरमच्छ पर गाज गिरेगी?


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