PWD में स्थानांतरित बाबू की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे अधिकारी, ई-फाइलिंग लागू न होने पर उठे सवाल, स्थानांतरण के बाद भी नहीं हट रहा बाबू


14/08/2025 10:46 PM Total Views: 26086
लखनऊ । नियम 111 के तहत एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने लोक निर्माण विभाग से साफ सवाल किया कि विभाग में ई-फाइलिंग व्यवस्था अब तक क्यों शुरू नहीं की गई। इस पर विभाग ने गोल-मोल जवाब दिया, जिससे संदेह गहरा गया है। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी मिलकर जानबूझकर ई-फाइलिंग शुरू नहीं होने दे रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के अध्यक्ष पद्मनाभ त्रिवेदी ने प्रमुख अभियंता कार्यालय, व्यवस्थापन “ग” वर्ग, लोनिवि लखनऊ में कार्यरत प्रधान सहायक वैभव कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानांतरण आदेश होने के बावजूद वह उसी सेक्शन में कार्यरत हैं और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। आरोप है कि ई-फाइलिंग लागू न करके फाइलों को जानबूझकर विलंब से भेजा जाता है, जिससे न्यायालय में अवमानना जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। हाल में एक वरिष्ठ अफसर लगा जुर्माना इसका उदाहरण है।
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संगठन के मुताबिक, वैभव कुमार के साथ वरिष्ठ स्टाफ ऑफिसर सुभाष चंद्र और मुख्य अभियंता (मुख्यालय-2) योगेंद्र सिंह का सहयोग भी है। पूर्व में भी संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायतें की गईं, पर विभागीय स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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आरोप यह भी है कि वैभव कुमार ने 5 प्रतिशत कोटे के तहत जेई पद पर पदोन्नति से संबंधित फाइलें वर्षों से अपने पास रोक रखी हैं। पदोन्नतियों और अनुमतियों में टाल-मटोल तथा सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। संगठन ने मांग की है कि उन्हें तत्काल सेक्शन से हटाकर उनके कार्यकाल की जांच कराई जाए, अन्यथा विभाग मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
वैभव पाण्डेय पर बिना पद 400 ड्राइवर के पद पर पदोन्नति का भी आरोप है। यही नहीं देवरिया में विभागीय जांच में दोषी पाए गए चार बाबुओं की फाइल वैभव कुमार ने पिछले 1 साल से दबा कर रखी थी। तत्कालीन स्टाफ ऑफिसर मेक प्रकाश को जब यह जानकारी हुई तो उन्होंने नियम साथ की कार्यवाही की चेतावनी देकर तत्काल फाइल को मंगाकर उक्त बाबुओं का स्थानांतरण किया।
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